International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
International Journal of Hindi Research
Vol. 6, Issue 2 (2020)

मुक्तिबोध: संघर्षों का ब्लैकहोल (विशेष सन्दर्भ—‘अँधेरे में’)


प्रभात कुमार

अँधेरे में कविता आज केवल वर्ग-संघर्ष का ही नहीं आज व्यक्ति का व्यक्ति के बीच आत्मसंघर्ष की दास्ताँ है,अन्तःस्तल का पूरा व्प्लाव है,दिल में उठ रहे विलोम सत्ता के खिलाफ आग है. ‘मै’ और ‘वह’ के बीच घोर तनाव है और यह तनाव ‘सपनो के भारत न बन पाने’ की कसक के कारण उपजता है.सपने में ही गाँधी के कन्धों पर शिशु अर्थात भारत को टिकाया जाता है.और इस तरह से ‘अँधेरे में’ स्वप्न शैली का अन्तःप्रवाह होता है और कव्नायक सपने में ही क्रांति करता है,इस क्रांति में उसका साथबड़े,बूढ़े,बच्चे,सभी,देते हैं.इस तरह इस लम्बी कविता में विप्लव,दर्शन,शिराओं में रिस रहे ज्ञान का मुकम्मल गान है.
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प्रभात कुमार. मुक्तिबोध: संघर्षों का ब्लैकहोल (विशेष सन्दर्भ—‘अँधेरे में’). International Journal of Hindi Research, Volume 6, Issue 2, 2020, Pages 58-62
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