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VOL. 6, ISSUE 3 (2020)
देवेन्द्र मेवाड़ी के नाट्य साहित्यः में बाल मनोविज्ञान
Authors
चंचल गोस्वामी, प्रिति आर्या
Abstract
देवेन्द्र मेवाड़ी के नाटक जो कि विज्ञान विषय पर आधारित हैं। यह ‘नाटक-नाटक में विज्ञान‘ नाम से पुस्तक रुप में संकलित है। यदि सम्पूर्ण पुस्तक का अवलोकन किया जाता है तो यह दिखाई देता है कि लेखक ने विद्यार्थियों के लिये उनकी रुचि के अनुरुप,उनके मनोविज्ञान को समझते हुए लेखन किया है। बाल विज्ञान के चरण होते हैं, जिज्ञासा,प्रेरणा, प्रसंसा, कल्पना,उत्साह इत्यादि। इनके नाटकों में यह चरण स्पष्टतः दिखाई देते हैं। इनके नाटकों में बच्चों का उत्साह,उनकी जिज्ञासा तथा उनकी उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लेखन मिलता है, साथ ही बड़े ही सरल ढंग से उनकी समस्याओं का समाधान भी दिखाई देता है। इनके नाटकों को विद्यार्थियों के लिये प्रेरणा भी कहा जा सकता है। जिस प्रकार माता- पिता अपने बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान करना चाहते हैं,उसी प्रकार इन नाटकों में भी विभन्न खोंजों का ज्ञान, इतिहास विषयक जानकारी, प्रकृति के विषय में जानकारी, प्राचीन प्राकृतिक समृद्धि और उसका ह्रास तथा समाज व्यवस्था का ज्ञान व रुढ़िवादिता से आगे निकलकर सही ढंग से जीवन जीने की प्रेरणा समाहित है।
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Pages:51-53
How to cite this article:
चंचल गोस्वामी, प्रिति आर्या "देवेन्द्र मेवाड़ी के नाट्य साहित्यः में बाल मनोविज्ञान". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 3, 2020, Pages 51-53
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