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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 3 (2020)
उपन्यासकार भुवनेश्वर मिश्र के उपन्यासों की कथ्यगत विवेचना
Authors
डाॅ. राजेश कुमार चन्देल
Abstract
भुवनेश्वर मिश्र हिन्दी उपन्यास के अग्रणी उपन्यासकारों में से एक है। हिन्दी उपन्यास लेखन, जब अपने आरंभिक अवस्था में ही सस्ती लोकप्रियता की सिढिया़ँ चढ़ रहा था। चारो तरफ तिलस्मी ऐयारी और रोमंाचक उपन्यासों की धूम मची थी, ऐसे समय में भुवनेश्वर मिश्र के, मनुष्य की दृष्टि से मनुष्य को देखनें के तरीके नें हिन्दी उपन्यास के पूरे मिजाज को बदलकर रख दिया। मिश्र जी ने अपने प्रभावशाली लेखन के माध्यम से उपन्यास को काल्पनिकता और ऐतिहासिकता के शिखर से नीचे ला कर औसत आदमी के पक्ष में खड़ा करने का काम किया। भुवनेश्वर मिश्र ने काफी कम मात्रा में उपन्यासों की रचना की जिसमें 1893 ई. में ’घराऊ घटना’ तथा 1901 ई. में की गयी उनकी रचना ’बलवंत भूमिहार’ ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। वैसे उनका प्रथम उपन्यास ’राघा रमण’ है, जिसके मात्र दो अध्यायों का प्रकाशन पटना से प्रकाशित हिन्दी सप्ताहिक पत्र ’बिहार बंधु’ में हुआ था। इसके शेष अध्यायों का प्रकाशन अभी तक नहीं हो पाया। लेकिन इन उपन्यासों की तीव्रता के कारण उन्हे कई प्रकार की चुनौतियों और व्यक्तिगत समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनके उपन्यासों में यथार्थवादी दृष्टि के कारण कथात्मक संवेदना जितनी सघन है, उतनी ही तरल है। प्रमाणिकता और यथार्थोन्मुखता का समावेश मिश्र जी के उपन्यासों की सबसे बड़ी विशेषता है।
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Pages:07-08
How to cite this article:
डाॅ. राजेश कुमार चन्देल "उपन्यासकार भुवनेश्वर मिश्र के उपन्यासों की कथ्यगत विवेचना". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 3, 2020, Pages 07-08
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