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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 3 (2020)
भारत-भारतीः पुनर्मूल्यांकन
Authors
डॉ. मनोज कुमार कैन
Abstract
‘भारत-भारती’ मैथिलीशरण गुप्त की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति है। इस कृति के लेखन की प्रेरणा उन्हें महावीर प्रसाद द्विवेदी और श्रीमान् राजा रामपाल सिंह से मिली थी। यह मैथिलीशरण गुप्त की एक ऐसी कृति है, जिसके द्वारा हम उनके भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे प्रेम और जुड़ाव का सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। इस कृति में उन्होंने एक तरफ भारतवर्ष के गौरवशाली इतिहास को व्याख्यायित किया है, तो दूसरी तरफ इसके वर्तमान और भविष्य को आशान्वित और उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त किया है। 'भारत भारती' के द्वारा गुप्त जी ने भारत की पराधीन जनता के अंदर नया जोश और स्फूर्ति का संचार किया। इस कृति ने उनको भारत में राष्ट्रकवि के रूप में प्रतिष्ठा दी। खड़ीबोली हिंदी की प्रतिष्ठा में भी इस कृति का महत्त्वपूर्ण योगदान है। लेकिन दुःख इस बात का है कि वर्तमान पीढ़ी इस कृति से अनभिज्ञ है। आज जरुरत है कि ऐसी पुस्तकों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और वर्तमान पीढ़ी को इसे पढ़ने और इससे प्रेरणा ग्रहण करने के लिए प्रेरित भी किया जाए।
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Pages:63-66
How to cite this article:
डॉ. मनोज कुमार कैन "भारत-भारतीः पुनर्मूल्यांकन". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 3, 2020, Pages 63-66
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