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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 4 (2020)
विदेशों में हिन्दी पत्रिकाओं का विकास
Authors
सोनाली नरगुंदे, मनीष काले
Abstract
पत्र-पत्रिकाएं आज विष्व के हर देष के लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गयी है। अफ्रीका के उन देषों को छोड़कर जहां प्रेस का अस्तित्व है ही नहीं, विष्व के अन्य देषों में दैनिक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की संख्या में बेतहाषा वृद्धि हुई है। समाचार पत्रों के साथ ही पत्रिकाओं ने भी अपना एक मुकाम बनाया है। आज विष्व के कई देषों में विष्व स्तरीय पत्रिकाओं को प्रकाषन हो रहा है, जिसमें टाइम, रीडर डायजेस्ट, प्ले बाॅय प्रमुख है। हिन्दी भाषा की पत्रिकाओं की बात करें तो विदेशों में भी इनका अपना एक मुकाम है। एक बड़ा पाठक वर्ग हिन्दी पत्रिकाओं का विदेशों में खड़ा हुआ है, जो स्थायी है। कई देशों में तो हिन्दी पत्रिकाओं के बड़े-बड़े स्टाॅल अलग से लगाये जा रहे है और उनकी बिक्री भी हो रही है। समय के साथ विदेशी भाषा वाले स्टाॅलों पर हिन्दी पत्रिकाओं की उपस्थिति हिन्दी पत्रिकाओं के महत्व और कद को बताती है।
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Pages:07-09
How to cite this article:
सोनाली नरगुंदे, मनीष काले "विदेशों में हिन्दी पत्रिकाओं का विकास". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 4, 2020, Pages 07-09
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