International Journal of Hindi Research

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International Journal of Hindi Research
Vol. 6, Issue 4 (2020)

अब्दुल बिस्मिल्लाह की कहानियों में नारी संघर्ष


Alapati Bhanu Prasad

नारी का संपूर्ण जीवन संघर्षरत होता है । नारी को हर घड़ी, हर क्षण संघर्ष करना पड़ता है । नारी का संघर्ष बहु आयामी है । प्राचीन काल से ही नारी पुरुष वर्ग से शोषित तथा पीड़ित थी । नारी प्रकृति से सहनशील होने के कारण अन्याय तथा अत्याचार सहती है । क्षमागुण में नारी धरित्री समान है । बर्दास्त के बाहर होने पर उसमें संघर्ष-चेतना जागृत होती है ।वर्तमान युग में नारी को अनेक संघर्षों का सामना करना पड़ता है । प्रकृति ने नर की अपेक्षा नारी को विशेष भाव प्रवण तथा संवेदनशील बनाया है । जहाँ पुरुषों के लिए बुद्धिपरक विचार धारा सहज गुण है, वहाँ स्त्रियों के मानस में श्रद्धा, विश्वास, संवेदना, कोमल भाव तथा सहानुभूति अपेक्षा कृत अधिक मात्रा में मिलती है । इस कारण नारियों को विभिन्न प्रकार के संघर्षों का समान करना पड़ता है । आधुनिक युग में शैक्षिक चेतना तथा व्यक्ति स्वातंत्र्य के कारण नारी में अनेक परिवर्तन हुए हैं । नारी अपने आप जीने के लिए तैयारी हो गयी है । माने वह अब किसी के कंधों पर बोझ होने की भावना को त्याग कर दी है । वह आत्मनिर्भर बन कर स्वयं अपना मार्ग निर्धारित करने लगी । जीवन में संघर्ष तथा परिश्रम करके अपना भविष्य उज्जवल बनाने का प्रयास करती है ।
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How to cite this article:
Alapati Bhanu Prasad. अब्दुल बिस्मिल्लाह की कहानियों में नारी संघर्ष. International Journal of Hindi Research, Volume 6, Issue 4, 2020, Pages 20-22
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