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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
नागार्जुन की संस्कृत एवं बंगला कविताओं में प्रकृति चित्रण
Authors
डॉ. राम बिहारी चौधरी
Abstract
जनकवि के रूप में लब्धप्रतिष्ठित कवि नागार्जुन ने आन्तर तथा बाह्य प्रकृति का बहुविध चित्रण किया है |प्राकृतिक सौंदर्य के वर्णन क्रम में कवि की संवेदनशीलता संप्रेषणीयता विवेच्य है |कवि ने प्रकृति के मानवीकरण के द्वारा प्रीतिनिष्ठा का प्रकाट्य कर भाव जगत में अलौकिकता की सृष्टि की है | कवि ने धरती की सोंधी गंध के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए,आकाश की इन्द्रधनुषी छटा का भी अवलोकन किया है इसप्रकार धरती-आकाश को संयुक्त कर, इन्होने मानवीय संवेदनाओं के उत्थान का भव्य वर्णन किया है | नागार्जुन की प्रकृतिपरक कविताएँउनकी आनुभूतिक सघनता को प्रकट करती है | कवि का कल्पना-विधान, सहज तथ्यों तथा भावों को उपस्थित कर, चमत्कार उत्पन्न करता है | इनकी प्रकृतिपरक रचनाओं में प्रवाहात्मकता,नाद-सौंदर्य तथा बिम्ब-विधान की सुन्दरता दृष्टिगत होती है |
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Pages:31-34
How to cite this article:
डॉ. राम बिहारी चौधरी "नागार्जुन की संस्कृत एवं बंगला कविताओं में प्रकृति चित्रण". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 31-34
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