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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 6, ISSUE 6 (2020)
कबीरदास : युग की माँग
Authors
डॉ. विष्णु तंकप्पन
Abstract
वर्तमान भारतीय समाज आज अनेक विषम परिस्थितियों से गुज़र रहा है । धार्मिक अंधविश्वास एवं भेदभाव, जातिवाद आदि के चंगुल में सामाजिक जीवन उलझ रहा है । जनता का दम घुटता जा रहा है । धर्म और सत्ता के अजीब गठबंधन ने इतना डरावना रूप धारण कर लिया है कि साहित्यकार भी इसके प्रति चुप्पी साधने के लिए विवश है । ऐसे सन्दर्भ में कबीर के अक्कड़ एवं विद्रोही व्यक्तित्व की प्रासंगिकता असंदिग्ध है । प्रस्तुत आलेख में आज की दुनिया में कबीर जैसे समाजोन्मुखी व्यक्तित्व की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है । कबीर जिस प्रकार युग की माँग बन जाते हैं इस पर भी प्रकाश डाला गया है ।
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Pages:134-136
How to cite this article:
डॉ. विष्णु तंकप्पन "कबीरदास : युग की माँग". International Journal of Hindi Research, Vol 6, Issue 6, 2020, Pages 134-136
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