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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
बालिकाओं के शैक्षिक पिछड़ेपन का समाज शास्त्रीय अध्ययन का प्रभाव
Authors
नीरज मिश्रा
Abstract
हमारे देष में शिक्षा पुरातन है। भारत में शिक्षा की जड़ें विदेशी नहीं हैं। वैदिक युग के साधारण कवियों से लेकर आधुनिक युग के बंगाली दार्षनिक तक, शिक्षकों और विद्वानों का एक निर्विघ्न क्रम रहा है। शिक्षा प्रकाश का वह स्रोत है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्षन करता है। शिक्षा क्षरा हमारे संज्ञयों का उन्मूलन और कठिनाइयों का निवारण होता है तथा विश्व को समझने की क्षमता प्राप्त होती है।
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Pages:40-41
How to cite this article:
नीरज मिश्रा "बालिकाओं के शैक्षिक पिछड़ेपन का समाज शास्त्रीय अध्ययन का प्रभाव ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 40-41
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