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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
कोरपोरेट वैश्वीकरण और किसान आत्महत्याएँ– ‘फाँस’ के संदर्भ में
Authors
जसीला ए. के, आनंद टी. ए
Abstract
पहले किसान और ज़मीन के बीच का संबंध सरल था । लेकिन आज भारत के छोटे किसान विनाश के कगार पर है । राष्ट्रीय अपराध रेकोर्ड ब्योरो द्वारा प्रस्तुत आंकडों के अनुसार सन् 1995 के बाद पूरे देश में तीन लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है । जैसे ही कृषि व्यवस्था जमीन से, हवा-पानी से और जैव-वैविधता से दूर हुआ तथा वैश्विक निगमों और वैश्विक बाजार से जुड़ा, तब से भारत के छोटे किसानों की उल्टी गिनती शुरू हो गई। संजीव ने ‘फाँस’ उपन्यास में किसानों की बदहाली के लिए उत्तरदायी खुली व्यापार नीतियों तथा कोरपोरेट सेक्टरों की षडयंत्रों को बेपर्दा किया है ।
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Pages:32-35
How to cite this article:
जसीला ए. के, आनंद टी. ए "कोरपोरेट वैश्वीकरण और किसान आत्महत्याएँ– ‘फाँस’ के संदर्भ में ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 32-35
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