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VOL. 7, ISSUE 2 (2021)
विश्व की प्राचीनतम जीवंत भारतीय संस्कृति: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के गद्य के आलोक में
Authors
तरुण पालीवाल
Abstract
भारतीय संस्कृति के इतिहास को लेकर अनेक भ्रांत धारणाएँ प्रचलित है। यहाँ पर जितनी भी जातियों के वंशज निवास कर रहे हैं। कतिपय विद्वानों ने उन सभी को भारत के बाहर की जातियाँ घोषित करने का दुष्कर्म किया है। जबकि, भारतभूमि पर मनुष्य का अस्तित्व लगभग तीन लाख वर्ष पुराना है। जिसका प्रमाण बड़ोदा राज्य के वादनगर (वर्तमान में वड़नगर) में प्राप्त आदिनीग्रो का तीस इंच लंबा कंकाल है। हालाँकि, यह प्रश्न अक्षुण्ण है कि मनुष्य कहाँ पर अस्तित्व में आया? किंतु, विज्ञान के अनुसार, उसके वर्तमान स्वरूप का गठन लगभग तीन लाख वर्ष पूर्व हुआ है। अत: न तो यह कहा जा सकता है कि भारत में मनुष्य का जन्म हुआ और न यह कि प्राचीन समय में यहाँ उसका कोई अस्तित्व ही नहीं था। जनविज्ञान और भाषा-विज्ञान के आधार पर भी भारत में विश्व की प्रमुख तीनों नस्लों और भाषाओँ के वंशज उपस्थित है। अत: वे यहाँ आए अथवा यहाँ से बाहर गए? यह प्रश्न अभी अनसुलझा है। दिनकर इस संदर्भ में अधिक कुछ नहीं कहकर यह कहते है कि भारतभूमि पर लाखों वर्षों से मनुष्य का अस्तित्व रहा है। भारतीय संस्कृति के मूल उत्स और निर्माता के प्रश्न पर वे मौन है। वे किसी एक जाति को इसका श्रेय देने के समर्थन में नहीं हैं। नीग्रो को इसकी आदिम जाति स्वीकार करते हैं। आग्नेय जाति द्वारा इस संस्कृति के स्वरूप गठन की प्रकिया आरंभ हुई। जिसे कालांतर में द्रविड़ और आर्य जाति ने पूर्णता प्रदान की। द्रविड़ जाति को वे मूलत: भारतीय मानते हैं। आर्य जाति कहीं बाहर से आई अथवा भारत में ही जन्मी इस पर वे निरुत्तर हैं। किंतु, वर्तमान भारतीय संस्कृति के स्वरूप निर्माता के रूप में उसके प्रति कृतज्ञ अवश्य है। अत: वे इसको विश्व की सबसे प्राचीन जीवित संस्कृति मानते हैं। उन्हें इस बात का अभिमान भी हैं।
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Pages:106-114
How to cite this article:
तरुण पालीवाल "विश्व की प्राचीनतम जीवंत भारतीय संस्कृति: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के गद्य के आलोक में ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 2, 2021, Pages 106-114
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