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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
मृदुला गर्ग के उपन्यासों में सामाजिक स्तर भेद और भाषा वैविध्य
Authors
के. कांचना
Abstract
मनुष्य ने एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए भाषा का प्रयोग किया है । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के नाते वह एक-दूसरे के संपर्क में आता ही है । वह अपने बौद्धिक विचारों, भावनाओं, विचार-विमर्शों की अभिव्यक्ति भाषा के माध्यम से करता है । यह सब मनुष्य के सामाजिक स्तर भेद के आधार पर होता है । समाज में कई प्रकार के स्तर भेद देखने को मिलते हैं जैसे आर्थिक वर्ग के आधार पर सामाजिक स्तर भेद इसके अंतर्गत उच्च, मध्य और निम्न वर्गों को देखा जा सकता है । शिक्षा के आधार पर सामाजिक स्तर भेद उच्च शिक्षित, अर्ध शिक्षित और अशिक्षित । व्यवसाय के आधार पर भाषा वैविध्य और पद के आधार पर भाषा वैविध्य । भारतीय समाज में शिक्षित और अशिक्षित लोगों की भाषा में भेद दिखाई देता है । वर्तमान समय में शिक्षित लोगों पर अंग्रेजी भाषा का प्रभाव अधिक नजर आता है। इसी कारण समाज के शिक्षित लोगों में द्विभाषिकता का अधिक प्रयोग हो रहा है । उसी प्रकार अशिक्षित लोग अक्सर इन बातों से उपेक्षित रहते हैं । किन्तु इस वर्ग के लोगों में प्रादेशिक बोलियों का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है । इन भेदों में भाषा और समाज का परस्पर अंतः संबंध होता है । समाज और भाषा दोनों एक-दूसरे निर्भर करते हैं । इसलिए समाजशास्त्री भी समाज की गति और दिशा मापदंड के तौर पर भाषा को रखना उच्चित समजते हैं ।
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Pages:11-17
How to cite this article:
के. कांचना "मृदुला गर्ग के उपन्यासों में सामाजिक स्तर भेद और भाषा वैविध्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 11-17
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