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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
भारतेन्दु युगीन साहित्य में व्यंग्य की अभिव्यक्ति
Authors
Rahul Dev M
Abstract
हिंदी साहित्य में व्यंग्य का महत्वपूर्ण स्थान है। समाज के हर क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों पर प्रहार करना एवं उन विसंगतियों बारे में समाज को सतर्क करने का दायित्व समकालीन हिंदी साहित्य में व्यंग्य के कंधों पर है। आज हिंदी साहित्य जगत में व्यंग्य एक विशाल वृक्ष बन चुका है उस वृक्ष का पालन पोषण भारतेंदु युग में हुआ था। समकालीन हिंदी गद्य व्यंग्य साहित्य का उद्भव भारतेंदु युग से ही माना जा सकता है। समकालीन व्यंग्य साहित्य को ठोस नीव भारतेंदु युग के व्यंग्यकारों ने ही प्रदान किया। भारतेंदु युग के प्रमुख व्यंग्यकारों में भारतेंदु हरिश्चंद्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र, राधाचरण गोस्वामी आदि का नाम उल्लेखनीय है। भारतेंदु से ही हिंदी गद्य व्यंग्य का शुभारंभ हुआ था। भारतेंदु युग में प्रहसन और स्तोत्र शैली में सबसे अधिक व्यंग्य लिखा गया था। व्यंग्य निबंध के विकास दृष्टि से भी भारतेंदु युग का महत्वपूर्ण स्थान है।
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Pages:81-84
How to cite this article:
Rahul Dev M "भारतेन्दु युगीन साहित्य में व्यंग्य की अभिव्यक्ति ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 81-84
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