ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
राष्ट्रीय चरित्र निर्माणः भारतीय शिक्षा दर्शन का उद्देश्य
Authors
डॉ. सतीश कुमार पांडेय
Abstract
राष्ट्र और उसके नागरिकों एक घनिष्ठ सम्बन्ध होता है । राष्ट्र हमारे सुरक्षा और संप्रभुता का अनिवार्य अवयव है । राष्ट्रीय सुरक्षा, शांति स्थापना, उन्नति व प्रगति हेतु शिक्षा का विशेष महत्व है। राष्ट्र के प्रति मानव के कुछ कर्तव्य होते हंै उनके निर्वहन के लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा का कार्य अपने राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता का प्रचार करना होता है, किन्तु आधुनिक समय में हमारी शिक्षा स्वयं का ही अस्तित्व नहीं बचा पा रही है, तो राष्ट्र गौरव की रक्षा कैसे संभव है। राष्ट्र के गौरव को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि अपनी राष्ट्रभाषा, संस्कृति व सभ्यता को संरक्षित रखने के प्रयास किए जाए, तभी हम अपने परिवार, समाज व राष्ट्र के अस्तित्व को स्थापित रख पाएंगे। परिवार से लेकर राष्ट्र तक का उचित विकास आदर्श शिक्षा पर ही निर्भर करती है। अतरू स्पष्ट है की यदि हम अपने राष्ट्र को प्रगतिशील बनाना चाहते हैं तो अपनी आदर्श शिक्षा प्रणाली को महत्व देना हमारा प्रमुख कर्तव्य है। शिक्षा राष्ट्र के युवाओं के चरित्र निर्माण के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाती है। आत्मनिर्भर नागरिक ही आत्मचिंतन के बल पर परिवार समाज तथा राष्ट्र को एक बेहतर स्थिति प्रदान कर सकते हैं।
Download
Pages:85-88
How to cite this article:
डॉ. सतीश कुमार पांडेय "राष्ट्रीय चरित्र निर्माणः भारतीय शिक्षा दर्शन का उद्देश्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 85-88
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

