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VOL. 7, ISSUE 3 (2021)
तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना 2018: एक समीक्षात्मक अध्ययन
Authors
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
भारत की तटरेखा पहले से ही समुद्र के स्तर में वृद्धि से प्रभावित है । 2050 तक भारत के तटीय समुद्र के स्तर में अनुमानित 15 और 38 सेमी की वृद्धि से तटीय राज्यों के 5,763 वर्ग किमी संयुक्त क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों के जलमग्न होने, बाढ़ और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों और तूफानी लहरों में वृद्धि होने की संभावना है। नदियों की सदोष जल निकासी क्षमता एवं अनियोजित विनियमन जैसे अपर्याप्त बुनियादी ढांचों की वजह से जलवायु प्रभाव का सामना करने के लिए बाढ़ नियंत्रण संरचनाओं की विफलता तटीय क्षेत्रों की भेद्यता को और बढ़ा देती है। देश के तटीय राज्यों में चरम सीमा की मौसम की घटनाओं की तीव्रता और बारंबारता में वृद्धि हुई है; जिसके फलस्वरूप हाल के वर्षों में, भारत के तटीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से संबंधित कई जोखिमों के प्रति अतिसंवेदनशील हो गए हैं। भारत की पहली तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना 1991, जिसके द्वारा केंद्र सरकार को 7500 किमी लंबे समुद्र तट के संरक्षण और औद्योगिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त था, पिछले 27 वर्षों में, दो बार दोहरायी गयी है और 34 बार संशोधित की गयी है। सीआरजेड अधिसूचना भारत के 70 तटीय तथा 66 मुख्य भूमि के जिलों में और 4 द्वीप क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के जीवन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है; जिसकी कुल आबादी लगभग 171 मिलियन है और जो या भारत की आबादी का 14% हिस्सा है । विशेष रूप से उपेक्षित समुदायों का भविष्य, सीधे तौर पर तटों के स्वास्थ्य और प्राकृतिक आपदा तैयारियों से जुड़ा हुआ है। लेकिन जहां तक आधुनिकतम 2018 की अधिसूचना का सवाल है; जो तटीय पर्यावरण संरक्षण के प्रावधानों को एवं समुद्र जलस्तर वृद्धि के साथ चक्रवात की बढ़ती घटनाओं को नजरअंदाज करते हुए, केवल आर्थिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के एक तरफा उद्देश्य से इसे पारित की गयी है और जो तटीय समूदायों की आजीविका से जुड़े मुद्दों की जगह कॉर्पोरेट जगत के हित की पेशकश एवं वकालत करती है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत अनुसन्धान लेख तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना-2018 की पर्यावरण संरक्षण के प्रति त्रुटियाँ एवं तटीय समुदायों के प्रति उदासीनता को उजागर करता है।
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Pages:134-139
How to cite this article:
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे "तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना 2018: एक समीक्षात्मक अध्ययन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 3, 2021, Pages 134-139
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