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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2020: एक विहंगावलोकन
Authors
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
सरोगेसी उस दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति का एक विकल्प है, जो किसी कारण संतान उत्पन्न नहीं कर सकते, या करना नहीं चाहते है। सरोगेसी में एक महिला गर्भ धारण करने और बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से गर्भवती होने के लिए सहमत होती है, किन्तु प्रसूति के बाद नवजात शिशु को वह करारनामे के तहत अनुबंधित पक्ष- 'अभिप्रेत (इच्छुक) माता-पिता' को दे देती है। सरोगेसी के दो मुख्य प्रकार -'गर्भकालीन' एवं 'पारंपरिक' सरोगेसी में मूलभूत फ़र्क़ स्त्री-बीज के स्त्रोत से संबंधित है। पारंपरिक सरोगेसी में, सरोगेट माँ के स्त्री-बीज का उपयोग किया जाता है, जिससे वह अपने बच्चे की 'जैविक' माँ बन जाती है। किन्तु गर्भकालीन सरोगेसी में, स्त्री-बीज किसी और महिला का होने की वजह से सरोगेट माँ का बच्चे से कोई जैविक संबंध नहीं होता है। भारत में अल्प मूल्य में उत्कृष्ट चिकित्सा एवं पुख्ता बुनियादी ढांचे के साथ, गरीब सरोगेट की उपलब्धता और उच्च अंतरराष्ट्रीय मांग की वजह से 'वाणिज्यिक' सरोगेसी एक परिपूर्ण उद्योग की भाँति विकसित हो गया था। किन्तु 2008 के सेरोगेसी से जुड़े 'बेबी मांजी यामादा' केस में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के उत्तरप्रभाव के परिणाम-स्वरूप भारत सरकार को 'वाणिज्यिक' सरोगेसी की जगह 'परोपकारी' सरोगेसी कानून बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा सरोगेसी के दौरान कई प्रकार के विवाद भी होते रहते थे- जैसे कभी-कभी सरोगेट माँ ममतावश अभिप्रेत माता-पिता को संतान देने से मना कर देती है, या दंपत्ति बच्चे के विकलांग, या गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के कारण कस्टडी लेने से मना कर देते है। भारत का वाणिज्यिक सरोगेसी उद्योग, जो कभी सालाना $400 मिलियन का व्यवसाय था, अब सरोगेसी (विनियमन) विधेयक की वजह से बंद होने के कगार पर है। इस नए विधेयक के दिशा-निर्देशों के तहत सरोगेसी अब स्थानीय, परोपकारी और संबंधपरक बन गई है, यानी यह अब सिर्फ एक भारतीय विषमलिंगकामी जोड़े के लिए एक करीबी महिला रिश्तेदार द्वारा परोपकारी रूप याने बिना किसी मुआवजे से की जाती है। प्रस्तुत अनुसंधान लेख में सरोगेसी के अंतर्निहित एवं स्वाभाविक नैतिक दुविधाओं, कानूनी या संविधानिक खामियों और संभवित विवादों के विविध पहलुओं का सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2020 के परिपेक्ष्य में चिकित्सात्मक विवेचन है।
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Pages:05-10
How to cite this article:
डॉ सुभाष भिमराव दोंदे "सरोगेसी (विनियमन) विधेयक 2020: एक विहंगावलोकन ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 05-10
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