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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
मुंशी प्रेमचंद की पारिवारिक कहानियों में हास्य और व्यंग्य
Authors
रेखा कुमारी
Abstract
महान कथाकार मुंशी प्रेमचन्द ने भारतीय जीवन के सभी पक्षों के विविध रूपों को विविध परिदृश्यों के माध्यम से चित्रण कर कथा साहित्य को समृद्ध किया है । उन्होंने अपनी पारिवारिक कहानियों में समाज के उपेक्षित वर्ग किसान, मजदूर, हरिजन और नारियों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति को छिपाया नहीं, अपितु उसे अपनी सशक्त लेखनी से समाज के समक्ष उनके यर्थाथ को चित्रित किया है । पारिवारिक कहानियों में अनमेल विवाह, विधवा विवाह, बाल विवाह, नारियों का मान-सम्मान एवं उनकी सुरक्षा, वेश्यावृति, दलित विमर्श, कृषक, जमींदारी प्रथा, सामान्तवाद, शासन-व्यवस्था आदि का पारिवारिक परिप्रेक्ष्य पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रभावों को उकेरा है । और एक नये समाज में नये पारिवारिक परिवेश की कल्पना की है । उन्होंने परिवार में फैली कुरीतियों और विकृतियों का सजीव चित्रण कर समाज को नयी राह दिखाई है ।
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Pages:16-18
How to cite this article:
रेखा कुमारी "मुंशी प्रेमचंद की पारिवारिक कहानियों में हास्य और व्यंग्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 16-18
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