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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
मृदु शक्ति कुटनीति के परिप्रेक्ष्य में बौद्ध धर्म की अहमियत एवं अपरिहार्यता
Authors
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे
Abstract
वैश्विकरण एवं डिजिटल क्रांति के वर्तमान युग में राष्ट्रों के बीच बढ़ते संपर्क एवं सद्भाव के मद्देनजर ‘सौम्य या मृदु शक्ति’ (सॉफ्ट पॉवर) ने विश्व के विभिन्न देशों की विदेश नीति में विशिष्ट स्थान हासिल कर लिया है। कूटनीति के इस प्रतिमान स्थानांतरण में बौद्ध धर्म के अहिंसा, शांति और सहिष्णुता जैसे केंद्रीय सिद्धांत इसे संभावित मृदु-शक्ति का एक समृद्ध स्रोत बनाते हैं। भारत से उद्भवित होकर, पूर्वी और पश्चिमी संस्कृतियों में फैलनेवाला बौद्ध धर्म विश्व का एक प्रमुख धर्म है, जिसका पूरी दुनिया में गहरा प्रभाव और अद्भुत लोकप्रियता है। एशिया महाद्वीप में बौद्धों की कुल आबादी 98 प्रतिशत होने की वजह से बौद्ध धर्म किसी भी एशियायी महासत्ता की मृदु शक्ति को समृद्ध करने में सबसे प्रमुख और प्रबल दावेदार है। इसी दूरदृष्टि से महत्वकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड पहल' परियोजना को वैश्विक समर्थन जुटाने के लिए और अपनी छवि को अन्य बौध्द देशों में अधिकाधिक मुलायम एवं शिरोधार्य बनाने के लिए अनीश्वरवादी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने कुटनीतिक उद्देश्यों के लिए बौद्ध धर्म को अपनाया है और इसे मृदु शक्ति का कारगर जरिया बनाकर संपूर्ण एशिया को अपने अधीन करने के मंसूबे और प्रयास में वो सफल हुआ है। बौद्ध वैश्वीकरण और कूटनीति, जो मूल रूप से एक जमाने में अशोक और कनिष्क जैसे भारतीय सम्राटों द्वारा प्रचलित थी, आज चीनियों द्वारा अपने मृदु-शक्ति के कुटिनीतिक खेल में प्रभुत्व के साथ आजमाई जा रही है। बौद्ध धर्म के पारंपरिक संघ अनुशासन के लिए एक विश्वसनीय संस्था की कमी भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बार-बार विफलता की ओर ले जाती है । इसलिए बौद्ध दुनिया के साथ जुड़ने लिये भारत को एक सशक्त एवं सक्षम 'संघ' की आवश्यकता है। इसके अलावा सदियों पुराने खंडहर बने बौद्ध के पवित्र विरासत पर्यटन स्थलों का पुनरुद्धार या पुनःस्थापन करने की जरूरत है। बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक परंपराओं को गहराई से अपनाने और उसका वैश्विक प्रक्षेपण करने के लिए तथागत बुध्द द्वारा आविष्कृत 'विपश्यना' ध्यान प्रणाली को विश्व के सामने दृढ़ता पूर्वक प्रस्तुत करने और बुद्ध की भूमि से इसे एक अनमोल उपहार के रूप में प्रचारित करने की जरूरत है। बौद्ध धर्म प्राचीन भारत का अनमोल भू-राजनीतिक साधन है, जिसकी उपयोगिता उस दौर से कई ज्यादा आज इस सहस्राब्दी की चुनौतियों का सामना करने में कारगर स्थापित हो सकती है और इसी परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत अनुसंधान लेख में मृदु शक्ति कुटनीति में बौद्ध धर्म की अहमियत और अपरिहार्यता को तथ्यों के आधार पर उजागर किया है।
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Pages:57-62
How to cite this article:
डॉ. सुभाष भिमराव दोंदे "मृदु शक्ति कुटनीति के परिप्रेक्ष्य में बौद्ध धर्म की अहमियत एवं अपरिहार्यता ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 57-62
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