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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
महादेवी के विवेचनात्मक गद्य का वर्तमान मूल्य एवं तत्व
Authors
डा. भावना पाण्डेय
Abstract
महादेवी जी के द्वारा विभिन्न अवसरों पर दिये गये भाशणों में से आज अधिकांश अनुपलब्ध हैं। केवल कुछ ही अंशतः उपलब्ध हो पाये हैं। जिनमें से एक विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के दीक्षांत समारोह के अवसर पर दिया गया भाशण है, दूसरा महारानी लालकुँवरि महाविद्यालय बलरामपुर के दीक्षांत के अवसर पर दिया गया था एवं तृतीय उत्तरप्रदेश विधानपरिशद के उनके सदस्य मनोनीत किये जाने के दौरान दिया गया था। इन तीनों ही भाशणों को क्रमशः ‘शिक्षा का उद्देश्य’, ‘मातृभूमि देवो भव’ और ‘साहित्य, संस्कृति और शासन’ के नाम से संकलित हैं। ये निबंध महादेवी जी के ‘संभाशण’ नामक ग्रंथ में संकलित हैं। इन संभाशणों में महादेवी जी के महत्वपूर्ण साहित्यिक, सामाजिक और प्रगतिशील विचार संग्रहीत हैं। एक उदाहरण दृश्टव्य है जिसमें वे लिखती हैं कि ‘‘यह लिखना साहित्यकार का अपमान करता है कि वह जीवन संघर्श में साथ नहीं दे सकता। जो जीवन को आदर्श देते हैं, अनुभूति देते हैं ये तो जीवन के निरंतर साथी हैं ही। वे जीवन के मूल्यों की स्थापना भी करते हैं और उन मूल्यों की रक्षा के लिए बाजी लगाने की प्रेरणा भी देते हैं।’’
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Pages:75-78
How to cite this article:
डा. भावना पाण्डेय "महादेवी के विवेचनात्मक गद्य का वर्तमान मूल्य एवं तत्व ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 75-78
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