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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
भारत में दिव्यांगों के कानूनी अधिकार का संक्षिप्त विश्लेषण
Authors
धरमवीर यादव
Abstract
भारत एक लोकतांत्रिक देश है एवं इसमें सभी व्यक्तियों को एक समान अधिकार दिए गए हैं. समाज के वंचित वर्गों के लिए अलग से सकारात्मक क्रिया एवं कानूनी अधिकार बनाए गए हैं .भारत में दिव्यांगजनों के लिए भी कानूनों एवं अधिकारों का प्रावधान किया गया है. संक्षेप में दो प्रकार के अधिकार होते हैं पहला संविधानिक जिनका जिक्र संविधान में है एवं समय की मांग के अनुसार संसद एवं संविधान लागू करता है दूसरा वैधानिक अधिकार अर्थात यह अधिकार निर्मित मौजूदा अधिकारों का संशोधित रूप होता है. भारत में दिव्यांगजनों के लिए बने कानून एवं नीतियों की बात करें तो यह भारत में चल रहे बहुत बड़े आंदोलनों के जरिए प्राप्त हुए हैं. भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 1995 लागू किया गया. विकलांगजन अधिनियम 1995 संविधान के अनुच्छेद (253) सह पठित संघ सूची की पद क्रम संख्या 13 के अंतर्गत अधिनियमित किया गया है। यह एशियाई एवं प्रशांत क्षेत्र में विकलांग व्यक्तियों को पूर्ण भागीदारी और समानता की उद्घोषणा को कार्यान्वित करता है और उनकी शिक्षा उनके रोजगार, बाधा रहित परिवेश का सृजन, सामाजिक सुरक्षा इत्यादि का प्रावधान करता हैं यह अधिनियम 1 दिसम्बर 1992 को पेइचिंग में बुलाए गए अधिवेशन में एशियाई और प्रशांत क्षेत्र में विकलांग सक्रियों की पूर्णभागीदारी व समानता की घोषणा करता है । इसके अतिरिक्त समान भागीदारी अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांगजनों को 7 श्रेणियों में रखा गया तथा यह कानून बनने के बावजूद भी 20 वर्ष तक अमल में नहीं लाया गया जिसके बाद नए कानून को लाने की पहल की गई जिसके तहत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 को लाया गया जिसमें दिव्यांगजनों की श्रेणी को बढ़ाकर 7 से 21 कर दिया गया है तथा रोजगार के स्तर को बढ़ाकर 4 प्रतिशत तथा शिक्षा के आरक्षण को बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया.
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Pages:112-114
How to cite this article:
धरमवीर यादव "भारत में दिव्यांगों के कानूनी अधिकार का संक्षिप्त विश्लेषण ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 112-114
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