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VOL. 7, ISSUE 4 (2021)
भीष्म साहनी की सृजनशीलता
Authors
डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
भीष्म साहनी प्रगतिशील धारा के प्रमुख रचनाकार हैं। उनकी यह प्रगतिशीलता यथार्थ की भावभूमि पर अवलंबित हो कर आधुनिकता का वरण करती है। सहज एवं सरल व्यक्तित्व वाले भीष्म साहनी ने अपनी रचनाओं में जीवन यथार्थ का बखूबी चित्रण किया है। उनकी रचनाओं में जीवन से जुड़ी अंतर्विरोध एवं संघर्षशीलता का चित्र भी है एवं जीवन के प्रति सौंदर्य-दृष्टि भी है। उन्होंने अपनी सृजनधर्मिता को वैयक्तिकता के सीमाओं में आबद्ध न रख कर जन सामान्य के पीड़ा को अपनी लेखकीय संवेदना का आधार बनाया। उनकी यह जनवादी चेतना मानवीय करुणा एवं मानवीय मूल्यबोध व नैतिकता के रूप में उनकी रचनाओं में सर्वत्र विद्यमान है।उनकी रचनाओं के विषय सामान्य जन जीवन से संबंधित हैं। एक ओर उन्होंने शोषण एवं कुप्रथा जैसी सामाजिक विषमताओं का खुल कर उपेक्षा की तो दूसरी ओर व्यक्ति के स्वतंत्रता एवं अधिकार के लिए भी आवाज उठाई। साहनी जी ने 'झरोखे', 'कड़ियाँ', 'तमस', 'बसन्ती', जैसे उपन्यासों के अतिरिक्त ‘भाग्यरेखा’, ‘पटरियाँ’, ‘पहला पाठ’, ‘भटकती राख’, जैसी कहानी संग्रहों का सृजन किया है। हिंदी नाटकों के क्षेत्र में भी उन्होंने ‘हानूश’, ‘कबीरा खड़ा बाजार में’, ‘माधवी’ जैसे कृतियों का अमूल्य दान दिया है। उनका सम्पूर्ण रचना संसार मानवतावादी दृष्टिकोण से यथार्थ का पुनरावलोकन है। उनकी यही यथार्थ दृष्टि उनकी रचनाओं को सार्थक एवं सोद्देश्य बनाती है।
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Pages:118-126
How to cite this article:
डॉ. स्नेहलता दास "भीष्म साहनी की सृजनशीलता ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 4, 2021, Pages 118-126
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