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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
हिंदी और भारतीय इतिहास में बाल साहित्य
Authors
आयुष द्विवेदी
Abstract
बाल साहित्य आज भी गतिशील है। एक पुख्ता हिस्सा कहाँ है इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कहा जा सकता है की औपनिवेशिक समाज स्थापित हो जाने के कारण लेखकों को उचित समय या दृष्टिकोण नहीं मिला की इस ओर भी उनका ध्यान जा सके मुग़ल शासन में लेखक या तो भरण -पोषण के लिए लिखते रहे या फिर अंग्रेज़ शासन में स्वंत्रता की लड़ाई के खातिर कलम चलाते रहे द्य हालाँकि आधुनिक में समाज में बदलाव के दृष्टि से काफी रचनाएँ की गयीं जिसका एक स्वरुप बाल साहित्य के रूप में भी दिखता है द्य साहित्य और इतिहास दोनों में ही कुछ कुछ अंश उभरकर आतें हैं। पूर्णतः यह भी कहना गलत होगा की बाल साहित्य लिखा ही नहीं गया परन्तु यह भी नहीं कहा जा सकता की धाराप्रवाह बाल साहित्य की रचनाएँ की गयीं हैं। बदलते समय के अनुसार आज के लेखक इस पर पूर्ण जोर दे रहें हैं। चम्पक, बालक, नंदन यह आज के बाल साहित्य के केंद्र में हैं। यह कहा जा सकता है की आने वाले समय में इस साहित्य का भी अपना एक काल स्थापित हो जाएगा।
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Pages:85-86
How to cite this article:
आयुष द्विवेदी "हिंदी और भारतीय इतिहास में बाल साहित्य ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 85-86
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