Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उसकी राजनीति
Authors
मोनिका रानी, डॉ. नविनता रानी
Abstract
सोना आग की तपिश में कुंदन बनता है अर्थात् तपकर ही उस आकृति में ढलता है जिसे धारण करने से धारण करने वाले की शख्सियत में चार चांद लग जाते हैं। लेकिन सोने को धारण करने योग्य जितने भी श्रेष्ठ पुरुष हुए हैं, वे भी आसानी से महादीर्घ नहीं हुए हैं और ना ही ऐसे बने हैं कि लोग उनके प्रतिमानों को स्वअस्तित्व में धारण करें। उन्होंने अपने प्राण को जिंदगी की भाठी में गति दी। तब वे महान व्यक्ति कहलाए अर्थात् वृहत बलिदान करके महान बना जाता है और उदारता कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसका बाजार में क्रय-विक्रय हो सके और उदार बना जाए। इन्हीं महान व्यक्तियों की श्रृंखला में एक महान पुरुष थे “पं० दीनदयाल उपाध्याय”
Download
Pages:68-70
How to cite this article:
मोनिका रानी, डॉ. नविनता रानी "पंडित दीनदयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उसकी राजनीति ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 68-70
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.