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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
मूल्यांकन पद्धति में पुनर्रचना की आवश्यकता- क्यों?
Authors
डॉ. आभा सिंह
Abstract
शिक्षा न केवल मनुष्य को सुसंस्कृत बनाती है अपितु यह हमारी संवेदनशीलता को भी बढ़ाती है जिससे राष्ट्रीय एकता पनपती है, वैज्ञानिक समझ बढ़ती है और कुल मिलाकर संविधान द्वारा प्रतिष्ठित समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता होती है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में समाजिक व नैतिक मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए प्रयास किए जाना अनिवार्य है। शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए हम आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा पद्धति पर अधिक निर्भर रहते हैं। निःसंदेह मूल्यांकन की प्रक्रिया की आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता परंतु मूल्यांकन परंपरा का निर्वहन करते समय आवश्यक यह हो गया है कि हम अपनाए जा रहे मापदंडों के लाभ और हानि से परिचित हो जाएं। यदि मूल्यांकन पद्धति संख्यात्मक उपभोग कर रही है और गुणात्मक उत्पादन करने मे असमर्थ है तो उस मूल्यांकन पद्धति में सुधार की आवश्यकता है। नीति निर्धारण करने वालों को यह देखना होगा कि आर्थिक नफा-नुकसान की धुरी पर शिक्षा को नहीं देखा जा सकता क्योंकि यह समाज के उस वर्ग को नैतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिम्मेदारी उठाने का साहस देने का माध्यम है, जिसे हम भविष्य कहते हैं।
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Pages:83-84
How to cite this article:
डॉ. आभा सिंह "मूल्यांकन पद्धति में पुनर्रचना की आवश्यकता- क्यों? ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 83-84
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