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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 7, ISSUE 6 (2021)
ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियों में निहित दलित चेतना का स्वरूप
Authors
सदानंद वर्मा
Abstract
ओमप्रकाश वाल्मीकि दलित साहित्य के अग्रणीय रचनाकार हैं। दलित समाज और उनकी परिस्थितियों को लेखक ने न केवल देखा ही है बल्कि उसके सुख-दुःख को भलीभांति जिया भी है। उनके लेखन में दलित जीवन के अनुभव, संघर्ष, जिजीविषा, समानता, बंधुत्व व भाई-चारे की भावना को निरूपित करती हुई दिखाई पड़ती है। उनकी कहानियों में जहाँ जीवन के द्वन्द्वों और उनसे जूझते पात्रों का चित्रण दिखाई पड़ता है तो वहीं, अपने स्व से टकराते या बचकर निकल जाने की चेष्टा करते कुछ चरित्र भी हैं। दलित जीवन के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करने वाली इन कहानियों में मानवीय सरोकारों और संवेदनाओं को महत्ता दी गयी है। निश्चित तौर पर ओमप्रकाश वाल्मीकि की पीड़ा, दर्द, संघर्ष यथार्थ को प्रकट करती हैं। चूंकि उनकी मुखरता अंबेडकरवादी चेतना को ग्रहण किए हुए है। इसीलिए उनकी संवेदनाएँ दलित संवेदनाओं के यथार्थ स्वरूप को प्रस्तुत कर पाने में सफल हो पाती है।
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Pages:90-94
How to cite this article:
सदानंद वर्मा "ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियों में निहित दलित चेतना का स्वरूप ". International Journal of Hindi Research, Vol 7, Issue 6, 2021, Pages 90-94
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