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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
भारतेन्दु हरिश्चन्द्रः विलक्षण व्यक्तित्त्व पुनरावलोकन
Authors
डॉ. मीनाक्षी गुप्ता
Abstract
हिन्दी साहित्य के पुर्नजागरण के अग्रदूत भारतेन्दु हरिश्चन्द्र है। उन्हें अपने पिता से साहित्यिक संस्कार विरासत में मिले। संस्कृत और ब्रजभाषा में अच्छी गति का प्रेरणास्त्रोत भी उन्होंने अपने पिता को माना है। भारतेन्दु का भाषा सम्बन्धी दृष्टिकोण संकीर्ण नहीं था, वो सिर्फ हिन्दी भाषा की उन्नति के ही इच्छुक न थे अपितु चाहते थे कि सभी प्रादेशिक और प्रान्तीय, भाषाएँ स्वतन्त्र रूप से विकसित हो। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी का हृदय अत्यन्त उदार था। दुःखी व परेशान व्यक्ति के कष्ट निवारणार्थ वे अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तत्पर रहते थे। धन हीन होने पर उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इसी बात का रहता था कि अब वे उस रूप में उनकी सहायता नहीं कर पा रहे हैं। वह हिन्दी के पहले सशक्त और सफल पत्रकार थे। भारतेन्दु ने हिन्दी की अपनी निबन्ध परम्परा को जन्म दिया। वह भाषा के प्रथम समर्थ नाटककार थे। ’नाटक’ पर अपना विस्तृत निबन्ध लिखकर उन्होंने हिन्दी में तुलनात्मक और ऐतिहासिक समालोचना की नींव डाली। भारतेन्दुजी का जीवन और साहित्य परवर्ती साहित्यकारों व जनता के लिए अदम्य प्रेरणा का स्रोत बन गया।
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Pages:57-60
How to cite this article:
डॉ. मीनाक्षी गुप्ता "भारतेन्दु हरिश्चन्द्रः विलक्षण व्यक्तित्त्व पुनरावलोकन". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 57-60
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