International Journal of Hindi Research

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Vol. 8, Issue 1 (2022)

संजीव के ‘पाँव तले की दूब’ उपन्यास में शोषित मनुश्य का चित्र


Anjana A S

बीसवीं सदी के सशक्त हस्ताक्षर एवं चर्चित कथाकार के रूप में संजीव पहचाने जाते है। हिन्दी साहित्य में उनकी पहचान एक अलग अहमियत रखती है। संजीव आदिवासी समाज के हित चिंतक होने के कारण उनके उपन्यास में सर्वहारा समाज की शोषण मुक्ति की मंगल कामना की गई है। अपनी कथा साहित्य द्वारा संजीव ने आदिवासी जीवन का सूक्ष्म अवलोकन किया है। ‘पाँव तले की दूब’ उपन्यास में संजीव ने शोषित मनुष्य का मार्मिक चित्रण किया है।
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Anjana A S. संजीव के ‘पाँव तले की दूब’ उपन्यास में शोषित मनुश्य का चित्र. International Journal of Hindi Research, Volume 8, Issue 1, 2022, Pages 16-17
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