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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
भारतीय संस्कृति, साहित्य और समाजः कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में
Authors
गीता अस्थाना
Abstract
भारत वर्ष एक बृहद् लोकतांत्रिक देश है। यहाँ की संस्कृति वैश्विक क्षितिज पर अनेक बार अपना परचम फहरा चुकी है। भारतीय संस्कृति आध्यात्म एवं वैदिक मूल्यों एवं परम्पराओं से अनुप्राणित होने के कारण वैशिष्टयपूर्ण हैं। अपनी प्राचीनतम् विशिष्ट मूल्यों, परम्पराओं से अनुश्रूत भारतीय संस्कृति के कारण पहले भी भारत विश्वगुरू जैसे माहात्म्य से विभूषित हो चुका है। भारतीय संस्कृति का वैशिष्ट्य यहां के साहित्य व समाज का अवलोकन करने पर ज्ञात होता है। श्रेष्ठतम साहित्य में भारतीय समाज की विशेषता एवं सांस्कृतिक गौरव की अभिव्यक्ति होती है। ‘विश्वगुरू’ भारत सदैव से ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के उदात्त एवं उदार मूल्यों की प्रतिष्ठापना करता समय-समय पर आयी राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विपदाओं का सामना करते हुये अपनी श्रेष्ठतम् संस्कृति की रक्षा करता रहा है। अतः भारतीय संस्कृति और साहित्य अनुकरणीय व वन्दनीय है। कोविड -19 जैसे महामारी के बीच भी भारतीय मेधा ने अपने सास्कृतिक वैशिष्ट्य के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी अस्मिता को गौरवान्वित किया है।
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Pages:26-28
How to cite this article:
गीता अस्थाना "भारतीय संस्कृति, साहित्य और समाजः कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में ". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 26-28
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