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VOL. 8, ISSUE 1 (2022)
रामचरितमानस हिन्दी साहित्य की एक अमूल्य धरोहर
Authors
अन्नू शर्मा, नवनीता भाटिया
Abstract
जिस काल में ‘रामचरितमानस’ की रचना परम् पूज्य श्रद्धेय स्वामी तुलसीदासजी द्वारा की गयी थी, उस काल में तत्कालीन शासकों के अव्यवस्थित शासन-व्यवस्था एवं कट्टरता से राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक जीवन त्रस्त हो रहा था। चतुर्दिक उत्पीड़न व यातनाओं द्वारा समाज विकृत दशा को प्राप्त हो रहा था। समाज में हिन्दू सनातन धर्म में विकृतियाँ जोर पकड़ती जा रही थी। देशकाल व परिवेश के अनुसार ही हिन्दू समाज में नैतिक, चारित्रिक, बौद्धिक, आदर्श मानदण्डों का पतन होता जा रहा था। स्वामी तुलसीदास जी ने ऐसे समय में हिन्दू सनातन धर्म व भारतीय समाज में आदर्श मानदण्डों की पुनः स्थापना की बीड़ा अपने हाथों में लिया। उन्हें खेद था कि इस समय यदि हिन्दू समाज व धर्म के आदर्श मानदण्ड स्थापित नहीं किए गए तो इससे धर्म की जड़े हिल जायेगी।
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Pages:52-53
How to cite this article:
अन्नू शर्मा, नवनीता भाटिया "रामचरितमानस हिन्दी साहित्य की एक अमूल्य धरोहर". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 1, 2022, Pages 52-53
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