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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
भारतीय समाज और स्त्री उद्यमिताः दशा एवं दिशा
Authors
लया एन
Abstract
भारतीय समाज पितृसत्तात्मक समाज है। पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री पुरुष के अधीन होती है। उसे समाज के हाशिये पर रखा जाता है और घर के भीतर। यही कारण है कि स्त्री पुरुष समाज द्वारा शोषित होती रही है। आधुनिक काल में नवजागरण के दौरान स्त्री समाज भी अपने अस्तित्व के प्रति जाग्रत हुआ। उसमें शिक्षा का प्रसार हुआ जिसके कारण वह घर चहारदीवारी के बाहर निकली। स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेने से लेकर जीवन के समस्त क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति प्रस्तुत की। स्वतंत्रता के उपरांत महिला उद्यमिता औद्योगिक और कार्पाेरेट क्षेत्र में सक्रियता और भागीदारी प्रस्तुत की। पुरुष प्रधान कॉर्पाेरेट क्षेत्र में महिला समाज निरंतर पहचान बना रहा है। हाल में हुए सर्वेक्षणों से यह बात पता चलता है कि महिला उद्यमिता शनैः-शनैः अपना विस्तार कर रही है। पर महिला उद्यमिता की इस यात्रा में उसे पुरुष वर्चस्व के विरुद्ध अभी लम्बी लड़ाई लड़नी है।
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Pages:71-75
How to cite this article:
लया एन "भारतीय समाज और स्त्री उद्यमिताः दशा एवं दिशा". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 71-75
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