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VOL. 8, ISSUE 2 (2022)
आगामी अतीत और मानवीय संबंधों का विघटन
Authors
मुहम्मद महताब खाँ
Abstract
आगामी अतीत का शाब्दिक अर्थ यह है कि वह अतीत जो भविष्य में हमारे समक्ष पुनः उपस्थित हो जाये। प्रस्तुत उपन्यास का नायक अपनी महत्वाकांक्षी प्रवृत्ति के कारण पूंजीवाद की गिरफ्त में फंसता चला जाता है। हम जानते हैं कि पूुंजीवाद सबसे पहले हमारी संवेदना को समाप्त करता हैं। संवेदना की मृत्यु पर ही पूंजीवाद का समूचा वृक्ष खड़ा है जहाँ मानवीय संबंधों का कोई मूल्य नहीं है। इसके साथ जब महत्वाकांक्षा का समागम होता हैं तो व्यक्ति का मूल्य और मानवीयता बहुत पीछे छूट जाते हैं। लेकिन जब इस मदिरा का नशा उतरता है तब अनुभव होता है कि हमने क्या खोया है। इस उपन्यास का नायक कमल बोस भी इसी चकाचौंध के पीछे भागता रहता है और बहुत कुछ पीछे छोड़ देता है। उसके लिए रिष्ते नाते, यहाँ तक प्रेम भी व्यर्थ लगने लगते हैं। लेकिन कहते हैं कि व्यक्ति का अतीत पलटकर वापस ज़रूर आता है। कमल बोस का अतीत भी उसके भविष्य में प्रकट होता है और उसके पास पछताने के सिवा कुछ नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उसे धन-संपदा की नहीं बल्कि जन-संपदा की ज़रूरत पड़ती है और ऐसी स्थिति में वह पीछे मुड़कर देखता है कि इस दौड़ में उसे ठोकर कहाँ लगी थी जिसकी अनुभूति वह नहीं कर सका। आगामी अतीत उपन्यास का आधारबिंदु यही अपराधबोध है।
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Pages:76-78
How to cite this article:
मुहम्मद महताब खाँ "आगामी अतीत और मानवीय संबंधों का विघटन". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 2, 2022, Pages 76-78
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