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VOL. 8, ISSUE 3 (2022)
क्रांतिकारी महिला कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान
Authors
डॉ. ड़ी. मोहिनी
Abstract
हिंदी साहित्य जगत की क्रांतिकारी महिला कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सुभद्रा जी का योगदान महत्वपूर्ण है। इनकी वाणी में देश प्रेम और विद्रोह की भावन मुख्य रूप से है। सुभद्रा कुमारी चौहान अपनी लेखनी से राष्ट्रीय चेतना का प्रसार करने वाली सर्वप्रथम महिला कवयित्री हैं। देशभक्त क्रांतिकारी सुभद्रा जी ने जीवन के अनेक पहलूओं को देखा और बहुत बार जेल भी गई। जेल में रहकर भी उन्होंने कैदियों की समस्याओं पर अनेक रचनाएँ लिखी। सुभद्रा जी द्विवेदी युग और छायावाद युग की राष्ट्रचेतना की कवयित्री हैं। सुभद्रा कुमार जी के कव्य में नारी की स्वाभिमान एवं गौरव गाथा का वर्णन कया है साथ ही नारियों का कर्तव्यपरायण रूप भी सामने लाया है। जब पूरा देश स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत था तब नारियों ने ही पुरुषों को आगे बढ़ने की हिम्मत दी।नारी सशक्तीकरण की आवाज़ सदैव उठती रहती है। सुभद्रा जी राष्ट्रभाषा और साहित्य की हमेशा सेविका रही हैं। उन्होंने साहित्य द्वारा राष्ट्रीय प्रेम और राष्ट्रीय चेतना का प्रसार करने का महान कार्य किया। विदेशी शासन की घोर निंदा भी की साथ ही भारतीय जनता पर हो रहे अकारण अत्याचारों का घोर विरोध किया।
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Pages:63-65
How to cite this article:
डॉ. ड़ी. मोहिनी "क्रांतिकारी महिला कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 3, 2022, Pages 63-65
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