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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
पथरीला सोनाः प्रवासी भारतीयों के इतिहासबोध और पीड़ाबोध का आख्यान
Authors
विनोद कुमार बी एम
Abstract
संवेदना साहित्य सृजन का आधार है। साहित्यकार की संवेदना ही उसे सृजन के लिए प्रेरित करती है । संवेदना को गहनता से महसूस करना और उसे शब्दों के माध्यम से रूपायित कर देना ही साहित्य की उपलब्धि है। इस दृष्टि से रामदेव धुरंधर द्वारा रचित पथरीला सोना हिन्दी साहित्य की विशिष्ट कृत्ति है पथरीला सोना के माध्यम से रामदेव धुरंधर ने प्रवासियों की पीड़ा और वेदना को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है। भावनात्मकता और आक्रोश जो समन्वय इस उपन्यास में सर्वत्र देखने को मिलता है । पथरीला सोना में लेखक ने कुदाल से कलम तक की यात्रा को जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया है । रचनाधर्मिता के प्रति प्रतिबद्ध होना रामदेव की अन्यतम विशेषता है । इस उपन्यास में कथाकार का व्यक्तिगत जीवन विषय वस्तु के साथ घुल-मिलकर कथा फलक पर उभरा है। जो कुछ भी देखा,भोगा और जीया उसे जस का तस हमारे समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
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Pages:21-23
How to cite this article:
विनोद कुमार बी एम "पथरीला सोनाः प्रवासी भारतीयों के इतिहासबोध और पीड़ाबोध का आख्यान". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 21-23
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