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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 4 (2022)
केदारनाथ सिंह के काव्य का शिल्प
Authors
रवीन्द्र कुमार
Abstract
केदारनाथ सिहं प्रगतिशील कवि, नार्गाजुन, त्रिलोचन शास्त्री, केदारनाथ अग्रवाल की भांति ज़मीनी कवि हैं। उनके काव्य परिदृष्य में चित्रांे के साथ-साथ चरित्र को भी देखा जा सकता है । कवि की सवंदेना एवं अनुभव का ही परिणाम है कि ‘कुदाल’ नामक कविता में चित्र और चरित्र दोनों एक साथ खड़े दिखायी देते हैं। वे धैर्य एवं संयम के साथ अपने काव्य में तर्क को प्रस्तुत करते हैं । तर्क सभ्ंावतः तंत्र की भांति प्रयोग मंे लाये जाते है। उनके काव्य मंे भाव-बोध को प्रगतिपरक तत्व के रूप में देखा जा सकता है जिस कारण उनके काव्य में एक लचक और धुँधले में चमकती हुई लकीर देखी जा सकती है। कवि केदारनाथ सिंह समकालीन कवियों में अग्रणी स्थान रखते हैं। वह अपने काव्य के माध्यम से समाज की छोटी-बडी़ सभी वस्तुआंे को यथार्थ के धरातल पर अभिव्यक्त करते है जिस कारण गांव से लेकर महानगर तक की समस्त वस्तुआंे को उनके काव्य में सहजतापवूर्क देखा जा सकता है । उन्हानंे बचपन के दिन गाँव मंे बिताये अध्ययन के लिए नगर की ओर पलायन किया तथा कार्य के लिए महानगर को चुना। इसलिए उनके काव्य में गाँव, नगर और महानगर की वस्तुओं का बारीकी से चित्रिण किया गया है। कवि केदारनाथ सिंह का संपूर्ण काव्य-लेखन सामाजिक यथार्थ से ओत-प्रोत है । वह अपने काव्य-लेखन के माध्यम से निरंतर लोक-जीवन से जुड़े रहे हैं। मानव अपनी चेतना के द्वारा सामाजिक व्यवहारों का ज्ञान अर्जित करता है । इन्ही तत्वों को आधार बनाकर कवि केदारनाथ सिंह को लोक-जीवन का कवि कहा जाये तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्यांेकि लोक-जीवन के यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाला कवि लोक की मिटट्ी का गायक एवं वाहक होेता है। उसकी रग-रग मंे लोक-जीवन का परिवेश और वहाँ की गंध समाहित होती है। कवि इस गंध को साहित्य में पिरोता हुआ नज़र आता है। एक प्रणय गीतकार के पश्चात वे सामाजिक यथार्थ से जुड ़जाते है और सामाजिक यथार्थ के समस्त पहलुआंे को परत-दर-परत खोलते है । केदारनाथ सिंह अंततः एवं मूलतः किसान चेतना के कवि प्रतीत होते हैं। उनके काव्य को भारतीय कृषि प्रधान सस्ंकृति और जनपदीय एवं जातीय सस्ंकृति एवं ंसभ्यताआंे के मध्य स्वीकार करना चाहिए। उनके काव्य मंे कोई भी बात सीधी-सीधी अभिव्यक्त होती नहीं दिखायी देती है,।
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Pages:87-89
How to cite this article:
रवीन्द्र कुमार "केदारनाथ सिंह के काव्य का शिल्प". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 4, 2022, Pages 87-89
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