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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
अमृतलाल नागर के साहित्य में युग चेतना
Authors
ज्ञानी देवी गुप्ता
Abstract
युगचेतना को शब्दों के चौखटे में जड़कर प्रेमचंद ने भी प्रस्तुत किया था, किन्तु नागर ने उस चौखटे के आस-पास एक ऐसी दुनियां की छवि भी उभारी है जो रंगीन भी है, कटु भी है, सीधी और सरल भी है तो यथार्थ भी है। उसमें गाँव दमकते हैं, शहर चहकते हैं, तो भोली-भाली जिन्दगियों की मासूमियत भी है और उन जिन्दगियों का गुनाह की वेदी पर चढ़ाकर आभिजात्य लादे रहने वाले पौरुषहीन व्यक्ति भी हैं। अमृतलाल नागर एक प्रतिभाशाली और प्रबुद्ध सर्जक हैं। अतः उनकी कृतियों में करवट बदलते और सिसकते भारत के समाज, इतिहास और संस्कृति की तस्वीरें उजागर होती चली गई हैं। कथ्य की सजगता, शिल्प की नवीनता और अनुभव की प्रौढ़ता ने उन्हें जीवन के बारीक से बारीक रेशों को पकड़ने की गहरी अन्तर्दृष्टि दी है। निश्चय ही लेखक का अनुभव सिद्ध मानस अब तक के साहित्य की जाँच करता रहा है और टटोलता रहा है अपने सामाजिक साहित्यकारों की गतिविधियों को।
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Pages:1-3
How to cite this article:
ज्ञानी देवी गुप्ता "अमृतलाल नागर के साहित्य में युग चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 1-3
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