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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
समकालीन संवेदना और ‘दंगे में मुर्ग़ा’
Authors
प्रतिमा यादव
Abstract
ज्ञान चतुर्वेदी के व्यंग्य समाज में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों अपना आधार बनाते हुए उनपर प्रहार करने का कार्य करते हैं। उनके व्यंग्यों का केंद्रीय-विषय समाज की केवल एक विसंगति पर नहीं वरन् सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं आदि पर केंद्रित होता है। ज्ञान चतुर्वेदी जी ने न सिर्फ़ सामाजिक सरोकारों को अपने व्यंग्यों का आधार बनाया है वरन् उन्होंने अपने व्यंग्यों के माध्यम से समाज में व्याप्त विसंगतियों के प्रति संवेदना जागृत करने का भी कार्य किया है। ‘दंगे में मुर्ग़ा’ व्यंग्य-संग्रह महज़ एक कुशल रचना ही नहीं है वरन् समाज को एक नयी दिशा दिखाने में भी सहायक है। ऐसी दिशा जहां व्यक्ति सामाजिक संवेदना के साथ-साथ व्यक्तिगत संवेदना के प्रति भी सजग हो।
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Pages:16-17
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प्रतिमा यादव "समकालीन संवेदना और ‘दंगे में मुर्ग़ा’". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 16-17
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