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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 8, ISSUE 5 (2022)
व्यंग्य साहित्य पर तत्कालीन परिस्थितियों का प्रभाव
Authors
प्रतिमा यादव
Abstract
आज़ादी के बाद के वर्षों में भारत में अनेक राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विसंगतियाँ पनपी और साथ ही भ्रष्टाचार, ग़रीबी, भुखमरी जैसे मुद्दों नें इन विसंगतियों को और बढ़ावा दिया। स्वाधीनता पूर्व जिस बंधन के कारण लेखक की कलम बंधीं हुई थी उस बंधन की डोर आज़ादी के बाद टूट गयी। इन सभी परिस्थितियों नें एक ऐसी उर्वरक भूमि तैयार की जिसने अनेक व्यंग्यकारों को पैदा किया। व्यंग्य अचानक से नहीं उपजा वरन् व्यंग्य का जन्म क्रमिक रूप से हुआ है। जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास होता गया वैसे-वैसे मानव-समाज में विसंगतियाँ भी उत्पन्न होती चली गयी। इन्हीं विसंगतियों के परिणामस्वरूप व्यंग्य का प्रादुर्भाव हुआ। व्यंग्य के इतिहास में काल-विशेष की परिस्थितियों एवं प्रवृत्तियों का विशेष योगदान रहा है। इन परिस्थितियों नें कई बार अवसर के रूप में तो कई बार समस्याओं के रूप में व्यंग्यकार को प्रभावित किया है।
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Pages:43-45
How to cite this article:
प्रतिमा यादव "व्यंग्य साहित्य पर तत्कालीन परिस्थितियों का प्रभाव". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 5, 2022, Pages 43-45
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