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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में नारी-वेदना
Authors
डॉ० पूनम भारद्वाज
Abstract
आधुनिक हिंदी साहित्य में महिला उपन्यासकारों ने अपने उपन्यासों में नारी जीवन को खुलकर व्यक्त किया है। उषा प्रियंवदा, कृष्णा सोबती, प्रभा खेतान, मृदुला गर्ग, मृणाल पांडे, मैत्रेयी पुष्पा, चित्रा मुद्गल, ममता कालिया, नासिरा शर्मा, मन्नू भंडारी, शिवानी आदि प्रमुख उपन्यासकार हैं। इन लेखिकाओं ने अबोध और नए एहसास के माध्यम से गहरे अनुभव जगत का साक्षात्कार कराया है। उषा प्रियवंदा के उपन्यासों की नायिकाएँ भारतीय परिवेश में पली हुयी हैं, परंतु साथ ही साथ अपनी बुद्धिवादिता, स्वतंत्र विचार-शक्ति एवं शिक्षा के कारण उन पर पाश्चात्य संस्कारों का भी पर्याप्त प्रभाव दिखायी देता है। पूर्णतरू भारतीय जीवन पद्धति को वे अपना नहीं सकती और न ही वे पूर्णतः पाश्चात्य ढंग की बन सकती हैं। स्त्री-लेखन- उस वर्ग का लेखन है, जो शोषण और दमनकारी पुरुष से प्रभावी अंग रहा है। स्त्री-विमर्श में पुरुष का विरोध नहीं है, बल्कि ‘पुरुष पर निर्भरता’ का विरोध हो रहा है। आज की नारी-लम्बी लड़ाई रही है वह पुरुष से भिन्न अपनी पहचान बनाने में लगी है। हार भी रही है, पर हार-थककर शांत नहीं बैठ रही। वह सिर उठाकर आगे बढ़ने की सतत् कोशिश में लगी है। स्त्री यदि इन तमाम जकड़नों से मुक्त नहीं होती तो समाज की मुक्ति भी संभव नहीं होगी।
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Pages:18-19
How to cite this article:
डॉ० पूनम भारद्वाज "महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में नारी-वेदना". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 18-19
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