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VOL. 8, ISSUE 6 (2022)
सूर्यबाला के कथा साहित्य में बेरोजगार युवाओं की समस्याएं
Authors
Sonali Ghatak
Abstract
बेरोजगारी समाज पर कलंक है, जिससे आर्थिक स्थिति बिगड़ती है। इसके कारण व्यक्ति के जीवन में असन्तोष तथा अस्थिरता व्याप्त रहती है। शिक्षा के विकास के साथ मध्यवर्गीय शिक्षित युवा वर्ग बेरोजगारी के नागपाश में जकड़ा सर्वाधिक यंत्रणाएं भोग रहा है। युवा वर्ग के सम्बन्ध में मंजुलता छिल्लर का मत है, ‘‘आज युवकों में निराशा, असन्तोष एवं तनाव का मुख्य कारण उनके जीवन में व्याप्त आर्थिक असुरक्षा है। युवा शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात कोई नौकरी करना चाहते हैं, अपने को किसी व्यवसाय में लगाना चाहते हैं परन्तु उन्हें ऐसी कोई सुविधा साधारणतः मिल नहीं पाती है। परिणामस्वरूप उनमें घोर निराशा दिखायी पड़ती है।’’ इस प्रकार शिक्षित होते हुए भी युवा वर्ग को अपनी योग्यतानुसार काम नहीं मिलता। सूर्यबाला ने अपने कथा साहित्य में रिश्वतखोरी, अर्थाभाव तथा गरीबी के कारण युवाओं में व्याप्त बेरोजगारी को अभिव्यक्ति प्रदान की है।
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Pages:35-36
How to cite this article:
Sonali Ghatak "सूर्यबाला के कथा साहित्य में बेरोजगार युवाओं की समस्याएं". International Journal of Hindi Research, Vol 8, Issue 6, 2022, Pages 35-36
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