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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
स्वातंत्रोत्तर हिंदी कहानी में प्रेम का बदलता स्वरूप
Authors
कुसुम सबलानिया
Abstract
इस शोध पत्र में हिंदी कहानी में आरंभ से लेकर वर्तमान समय तक कि प्रेम कहानियों के माध्यम से संबंधों में आए बदलाओं को समझने की कोशिश की गई है। ‘उसने कहा था’ से लेकर हम ‘अगली शताब्दी के प्यार का रिहर्सल’ तक पहुँच गए हैं। इस पूरी यात्रा को अगर प्रेम कहानियों में आए बदलाओं के जरिए देखें तो जहां प्रेम का संबंध भावनाओं से था वहीं आज भौतिकता से है। प्रेम अब एक वस्तु की भांति ही है। हिंदी कहानियों ने इसे बखूबी अभिव्यक्त किया है। समय और समाज में आए बदलावों के साथ प्रेम में भी बदलाव आया हैं। इन बदलाओं को इस शोध-पत्र के जरिए रेखांकित करने की कोशिश की गई है।
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Pages:7-9
How to cite this article:
कुसुम सबलानिया "स्वातंत्रोत्तर हिंदी कहानी में प्रेम का बदलता स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 7-9
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