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VOL. 9, ISSUE 1 (2023)
विश्व पटल पर हिन्दी भाषा का विकास
Authors
डॉ॰ सुशीला यादव
Abstract
“हिन्दी मेरी भाषा है, हिन्दी मेरी आशा है हिन्दी का उत्थान करना यही मेरी जिज्ञासा है।“ अब हिंदी न केवल भारत की बल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है। संसार के विविध क्षेत्रों में हिंदी करोड़ों लोगों की जीविका बन चुकी है। आज भारत के अलावा बंग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, भूटान, फिज़ी, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिडाड एवं टुबेगो, द.अफ्रिका, बहरीन, कुवैत, ओमान, कत्तर, सऊदी अरब गण राज्य, श्रीलंका, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, मॉरिशस और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में हिंदी की माँग बढती ही जा रही है। हिंदी वह भाषा है जो संस्कृत, प्राकृत, पाली के सहज एवं सरलतम रूप में आम जीवन में घुली मिली है। जिस तरह से भारत की सनातन संस्कृति आस्तिक-नास्तिक का भेद किए बगैर सबको साथ लेकर चलने में भरोसा रखती है, ठीक उसी तरह हिंदी का संसार भी बहुत विराट है। निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल.. यानी अपनी भाषा से ही उन्नति संभव है, क्योंकि यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है । भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध कविता निज भाषा आज भी प्रासंगिक है। आज हम अपने देश में भले ही अंग्रेजी को लेकर गर्व की अनुभूति करें, ब्रिटेन में हिंदी बोलकर और लिखकर भी कई लोगों ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
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Pages:10-12
How to cite this article:
डॉ॰ सुशीला यादव "विश्व पटल पर हिन्दी भाषा का विकास". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 1, 2023, Pages 10-12
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