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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने वाली महिलाओं के कार्य जीवन संतुलन पर एक अध्ययन
Authors
शालिनी शर्मा, अवधेश प्रतापसिंह
Abstract
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। और औद्योगिक प्रगति के बिना आर्थिक विकास भी संभव नहीं होता। औद्योगिकीकरण षब्द अग्रेंजी भाषा के इन्डेस्ट्रियलाइजेषन का हिन्दी रूपान्तरण है। इसका अर्थ है-किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उद्योगों की स्थापना और विकास आवश्यक है। औद्योगिकीकरण एक सामाजिक और आर्थिक प्रक्रिया है। किसी क्षेत्र विषेष, राज्य या देष के विकास में औद्योगिकीकरण का मुख्य योगदान है। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी आर्थिक, भौतिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक विषेषताएं होती हैं। जिसमें पाए जाने वाले नाकारात्मक प्रभाव के कारण औद्योगिक विकास की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न होता है। इस नकारात्मक प्रभाव को सकारात्मक उर्जा में परिवर्तित करके ही औद्योगिक विकास को गति और दिशा दी जा सकती है। औद्योगिक विकास में फैले नकारात्मक प्रभाव को सकारात्मक उर्जा में परिवर्तित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र के आधारभूत ढॉचें को सुद्धढ़ करना आवष्यक है। इसके लिए सर्वप्रथम आवष्यक है षिक्षा के स्तर को बढ़ाना। क्षेत्र के पिछड़े और मुख्य धारा से कटे हुए लोगों को उचित और रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान कर उन्हें भी आर्थिक विकास में भागीदार बनाना। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। और औद्योगिक प्रगति के बिना आर्थिक विकास भी संभव नहीं होता। औद्योगिकीकरण शब्द अग्रेंजी भाषा के इन्डेस्ट्रियलाइजेषन का हिन्दी रूपान्तरण है। इसका अर्थ है-किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उद्योगों की स्थापना और विकास आवशयक है। औद्योगिकीकरण एक सामाजिक और आर्थिक प्रक्रिया है। किसी क्षेत्र विशेष, राज्य या देश के विकास में औद्योगिकीकरण का मुख्य योगदान है। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी आर्थिक, भौतिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक विषेषताएं होती हैं। जिसमें पाए जाने वाले नाकारात्मक प्रभाव के कारण औद्योगिक विकास की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न होता है। इस नकारात्मक प्रभाव को सकारात्मक उर्जा में परिवर्तित करके ही औद्योगिक विकास को गति और दिशा दी जा सकती है। औद्योगिक विकास में फैले नकारात्मक प्रभाव को सकारात्मक उर्जा में परिवर्तित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र के आधारभूत ढॉचें को सुद्धढ़ करना आवष्यक है। इसके लिए सर्वप्रथम आवश्यक है शिक्षा के स्तर को बढ़ाना। क्षेत्र के पिछड़े और मुख्य धारा से कटे हुए लोगों को उचित और रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान कर उन्हें भी आर्थिक विकास में भागीदार बनाना । भारत में अधिकाश आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी कामकाजी महिलाएं अपनी नौकरी या रोजगार और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई का अनुभव करती हैं। वे अपने घर और काम के बीच संतुलन रखना तो चाहती हैं, किन्तु उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती है। अतः प्रत्येक विवाहित और अविवाहित महिला की प्रतिक्रिया पर यह शोधपत्र आधारित है।
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Pages:10-13
How to cite this article:
शालिनी शर्मा, अवधेश प्रतापसिंह "औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने वाली महिलाओं के कार्य जीवन संतुलन पर एक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 10-13
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