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VOL. 9, ISSUE 2 (2023)
यशपाल की समाजवादी चेतना का स्वरूप
Authors
नेत्ताकुप्पम श्रीनिवासुल
Abstract
इस लेख में यशपाल का परिचय देते हुए समाजवादी चेतना का अर्थ और परिभाषा दी गई है। भारतीय साहित्य के इतिहास में यशपाल जैसे प्रखर चिन्तक और क्रान्तिचेत्ता बिरले हैं। यशपाल का रचना संसार अत्यन्त विस्तृत है। उसमें से वर्तमान शोध के लिए केवल उनके कथा साहित्य को आधार बनाया गया है जिसके विस्तृत अध्ययन द्वारा यशपाल जी के प्रखर समाजवादी चिन्तक व्यक्तित्व को उद्घाटित किया जा सके। साहित्यिक रचनाओं में सामयिक चेतना ढूँढ़ना जो अतीत बन गया है। साहित्य में सामयिक चेतना ढूँढ़ने का अभिप्राय है लेखक के साथ-साथ लेखन प्रक्रिया के समय में जी लेना। अगर लेखकीय दृष्टि को समझना ही इसका तात्पर्य है तो साथ जीकर उसे समझने में शायद वह तटस्थ भाव नहीं आ सकता जो वैज्ञानिक अनुसंधान प्रक्रिया में अभिप्रेत होता है। वैसे साहित्य में सामाजिक चेतना ढूँढना साहित्य को साहित्येत्तर दृष्टि से देखना है परन्तु अन्य ज्ञानशाखाओं के मापदण्डों को विशेष दृ ज्ञानक्षेत्र की प्रविधि पर लागू करने से कुछ विशेष पल्ले पड़ सकता है। सामयिक, राजनैतिक, सामाजिक, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध की चेतना में आर्थिक आयाम का स्थान अनुशांगिक रहा है। इसलिए उसके महत्व का प्रतिपादन यथावश्यक रूप में किया गया है। भारतीय साहित्य के इतिहास में यशपाल जैसे प्रखर चिन्तक और क्रान्तिचेता बिरले हैं। यशपाल का रचना संसार अत्यन्त विस्तृत है। उसमें से वर्तमान शोध के लिए, केवल, उनके कथा साहित्य को आधार बनाया गया है, जिसके विस्तृत अध्ययन द्वारा यशपाल जी के प्रखर समाजवादी चिन्तक व्यक्तित्व को उद्घाटित किया गया है।
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Pages:16-19
How to cite this article:
नेत्ताकुप्पम श्रीनिवासुल "यशपाल की समाजवादी चेतना का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 2, 2023, Pages 16-19
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