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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
रस स्वरुप विवेचन के सन्दर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की समीक्षा दृष्टि
Authors
डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव
Abstract
भारतीय साहित्य में रस की महत्ता को नाकारा नहीं जा सकता रस कविता का मान दंड है .आचार्य भारत से लेकर पंडित राज जगन्नाथ और आधुनिक काल में आचार्य राम चन्द्र शुक्ल जैसे प्रमुख समीक्षक भी रस को साहित्य के सन्दर्भ में अपनी विचारधारा सेसंपूर्ण हिंदी साहित्यको अनिवार्य मानते है  भावो की सघनता और प्रभाव शीलता के बिना कविता का अस्तित्व ही नहीं है  प्रस्तुत शोध में रस की प्रासंगिकता कविता के लिए क्यों आवश्यक है ? तथा इसकी मार्मिकता से जनसाधारण किस तरह प्रभावित होता हैतथा लोक व्यवहार की कसौटी पर इसका मुल्यांकन किस प्रकार किया जायेगा .आचार्यशुक्ल  के समीक्षा दृष्टि में इस गंभीर विषय को द्रष्टव्य किया गया है. 
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Pages:11-12
How to cite this article:
डॉ अजय कुमार श्रीवास्तव "रस स्वरुप विवेचन के सन्दर्भ में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की समीक्षा दृष्टि". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 11-12
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