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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
वैश्वीकरण के परिप्रेेक्ष्य में साहित्य और मीडिया
Authors
सुप्रिया
Abstract
वैश्वीकरण के युग में मीडिया और साहित्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में अंग्रेजी और चीनी के बाद हिन्दी का स्थान आता है। वैश्वीकरण ने सम्पूर्ण संसार को एक परिवार के रूप मंे परिवर्तित कर दिया है। वैश्वीकरण का प्रभाव साहित्य, मीडिया, संस्कृति, कला, भाषा अािद पर व्यापक स्तर पर पड़ रहा है। हिन्दी भाषा पर भी इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। हिन्दी विश्व के लगभग 90 देशों में अपना स्थान बना चुकी है। हिन्दी के महत्व को समझते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रिका, ऑस्टेªलिया, सउदी अमीरात, कुवैत, मॉरिशस, मलेशिया, कनाडा, फ्रांस, बांग्लादेश, नेपाल, बहरीन आदि ने अपनी शिक्षा नीति में हिन्दी को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। वर्तमान युग कम्पयूटर और मीडिया का युग है। जैसे-जैसे इनका विकास हो रहा है वैसे ही हिन्दी भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। आज हम देखते है कि भारत में ही नहीं बल्कि अन्य कई देशों मंे भी भारतीय फिल्में, गाने, नाटक और यहाँ के फिल्मी कलाकार खूब पसन्द किए जाते हे। हिन्दी फिल्में विदेशी जमी पर रिकार्ड कमाई कर रही है। साहित्य ने भी हिन्दी को विदेशों में प्रतिष्ठा दिलाई है।
वैश्वीकरण के लिए भूमंडलीकरण, निजीकरण, उदारीकरण और बाजारवाद आदि नामों का प्रयोग किया जाता है। इसकी अवधारणा पूरे विश्व को एक गांँव में तब्दील करने की है जिसने पूरी दुनिया की तस्वीर ही बदल दी है। वैश्वीकरण की प्रक्रिया के आरंभिक दौर मंे भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में हिन्दी की तुलना में अंग्रेजी भाषा का महत्व बढ़ा था परंतु धीरे-धीरे उसकी गति धीमी होती गई। वैश्वीकरण में जहाँएक तरफ मुक्त बाजार की दलीलें पेश की गई वहीं दूसरी ओर दुनिया में एक नई उपभोक्ता संस्कृति को भी जन्म दिया। आजकल संयुक्त राष्ट्र और विश्व की प्रमुख भाषाओं मंे हिन्दी को सुमार करने की ठोस दलीले दी जा रही है। विश्व हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन भी एक ऐतिहासिक परिवर्तन की आहट है।
वर्तमान समाज मीडिया के नये युग में जी रहा है। वैज्ञानिक तकनीकों ने मीडिया के परंपरागत स्वरूप को व्यापक रूप में बदला है। साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है और आज को सोशल मीडिया पत्रकारिता और साहित्य दोनों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। तकनीकी विकास ने जिस गति से मीडिया के स्वरूप को बदला है, उसी गति से हिन्दी साहित्य के आंतरिक और बाह्य स्वरूप को भी। आज मीडिया के द्वारा ही हिन्दी साहित्य का विस्तार दुनिया भर में हो रहा है। सूचना तकनीक के इस नए युग से पहले साहित्य का स्वरूप किताबों और पत्र-पत्रिकाओं तक ही सीमित था, परंतु आज साहित्य किताबों से आगे मीडिया के अनगिनत साधनों पर उपलब्ध है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि 21वीं शताब्दी में जनसंचार माध्यम नए विकास के आयाम को छू रहें है। जिसके परिणामस्वरूप हिन्दी भाषा एवं साहित्य भी नई-नई चुनौतियों का सामना करने के लिए शक्तियों का अर्जन कर रहे हैं।
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Pages:3-5
How to cite this article:
सुप्रिया "वैश्वीकरण के परिप्रेेक्ष्य में साहित्य और मीडिया". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 3-5
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