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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
रवीन्द्रनाथ त्यागी के साहित्य में आर्थिक व्यंग्य का स्वरूप
Authors
रिंकु कुमारी राजभर
Abstract
स्वतंत्रता के पश्चात् औद्योगिकरण, नगरीकरण आदि का विकास हुआ, किन्तु आर्थिक विषमता संबंधित समस्याएँ भी बढ़ी है। आज परोक्ष रूप से देश की सारी अर्थव्यवस्था राजनीति से जुड़ी है। राजनीतिक तथा प्रशासनिक विषमताओं के परिणामस्वरूप आर्थिक विसंगतियाँ अर्थ के असमान वितरण के कारण होती है। नेता चुनाव में जितना खर्च करता है उससे कई गुना अधिक सत्ता में आने के पश्चात् अपना स्वार्थ साध लेता है। प्रशासकीय अधिकारी भी इस तरीके को अपनाते हुए ऐसी योजनाएँ बनाते हैं। जिससे उनको अधिक लाभ होता है। रवीन्द्रनाथ त्यागी के साहित्य में आर्थिक विसंगतियों से संबंधित इसी तरह की अनेक समस्याओं पर प्रहार किया गया है।
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Pages:13-15
How to cite this article:
रिंकु कुमारी राजभर "रवीन्द्रनाथ त्यागी के साहित्य में आर्थिक व्यंग्य का स्वरूप". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 13-15
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