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VOL. 9, ISSUE 3 (2023)
21वीं सदी की प्रमुख महिला लेखिकाओं की कहानियों में साम्प्रदायिक विमर्श
Authors
पूजा रानी
Abstract
साहित्य अपने समय, समाज और संस्कृति का संवाहक होता है। समन्वय की भावना ही भारतीय संस्कृति की विशेषता है। आजादी के साथ ही साम्प्रदायिकता का रूप सिर्फ धार्मिक न रहकर राजनीतिक रूप भी लेने लगा है, जो आज एक महामारी के रूप में पूरे देश को ग्रसित कर रहा है। इसके बीज राष्ट्र निर्माण के समय ही अंकुरित हो गये थे। आज चारों ओर भेदभाव, नफरत और कटुता का जहर फैलता जा रहा है।
वर्तमान समय में राजनीतिक धु्रवीकरण देखने में आ रहा है। ऐसे समय में साहित्य में साम्प्रदायिक सद्भाव होना अनिवार्य है; क्योंकि भविष्य में जब समाज को तोड़ने वाली शक्तियों का जिक्र आयेगा तो साहित्य की भूमिका पर अवश्य प्रश्न उठेगा। 21वीं सदी की प्रमुख महिला लेखिकाओं ने राष्ट्रीय और मानवीय मूल्यों के विघटन को बड़ी वेदना के साथ अपनी कहानियों में चित्रित किया है।
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Pages:26-27
How to cite this article:
पूजा रानी "21वीं सदी की प्रमुख महिला लेखिकाओं की कहानियों में साम्प्रदायिक विमर्श". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 3, 2023, Pages 26-27
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