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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
प्रकृति के सजग चितेरेः कवि सुमित्रा नन्दन पंत
Authors
डॉ. सुरेन्द्र कुमार
Abstract
सुमित्रानन्दन पंत छायावादी काव्यधारा के प्रमुख चार स्तंभों में प्रमुख जयषंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला एवं महादेवी वर्मा आदि में से एक माने जाते हैं। उनके काव्य में प्रकृति का अद्भुत चित्रण हुआ है। इसका श्रेय उन्होंने प्रकृति के निरीक्षण एवं अपनी जन्मभूमि प्रदेष कुमांचल को माना है। उन्होंने बताया है कि मनोरम एवं हरि-भरी प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण वातावरण का प्रभाव मन पर पड़ना स्वाभाविक होता है। यह वातावरण मनुष्य के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करता है। सुमित्रानन्दन पंत की प्रकृति जड़ नहीं अपितु चेतन होने के साथ - साथ मानवीय भावना के सरोकारों से ओत - प्रोत प्रतीत होती है। इस षोधपत्र में उनकी प्रकृति सम्बन्धी कविताओं के प्रमाणों के आधार पर सिद्ध करना है कि उनका प्रकृति चित्रण कितना सजग, अभूतपूर्व एवं अनोखा है।
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Pages:11-13
How to cite this article:
डॉ. सुरेन्द्र कुमार "प्रकृति के सजग चितेरेः कवि सुमित्रा नन्दन पंत". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 11-13
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