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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
निर्मला पुतुल की कविताओं में आदिवासी स्त्री अस्मिता
Authors
अनीष कुमार साकेत, डॉ. निरपत प्रसाद प्रजापति
Abstract
निर्मला पुतुल की कविताएँ समकालीन कविता लेखन में विशिष्ट हैं. ’नगाड़े की तरह बजते शब्द’ और ’बेघर सपने’ नामक उनके दो कविता संग्रहों में उनकी आदिवासी अस्मिता स्पष्ट है। इसमें आदिवासी स्त्री की भावना व्यक्त होती हैस उन्हें आदिवासी होने की पीड़ा और स्त्री होने की पीड़ा दोहराती दिखती है. उनकी कविताएँ आज की सच्चाई को उजागर करती हैं। निर्मला पुतुल की कविताएँ, भूमंडलीकरण और पश्चिमीकरण के इस दौर में स्त्री आदिवासी होने की व्यथा को नया स्वर देती हैं। पुरुष हो या स्त्री, आदिवासी समाज का व्यक्ति सभ्य समाज के मूल्यों को नकारता दिखता है। उनके कई प्रश्नों का उत्तर देने के लिए भी उन्हें प्रतिबद्ध होना पड़ता है। निर्मला ने अपनी सुंदर अभिव्यक्ति के माध्यम से आदिवासी जीवन को समझाया है। यही कारण है कि उनकी कविताओं में आदिवासी जीवन का भावपूर्ण चित्रण मिलता है।
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Pages:7-10
How to cite this article:
अनीष कुमार साकेत, डॉ. निरपत प्रसाद प्रजापति "निर्मला पुतुल की कविताओं में आदिवासी स्त्री अस्मिता". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 7-10
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