Logo
International Journal of
Hindi Research
ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 4 (2023)
हिंदी समकालीन साहित्य में आदिवासी अस्मिता पर निर्मला पुतुल का योगदान
Authors
अनीष कुमार साकेत
Abstract
दुनिया भर में आदिवासी समाजों ने अपनी लड़ाइयाँ अकेले लड़ी हैं, लेकिन मुख्यधारा के क्रांतिकारी साहित्यों ने भी उनके संघर्षों को मानवीय भावना के साथ चित्रित किया है। यह प्रश्न उठता है कि किसी को उनकी चिंता क्यों नहीं है? यह समुदाय आज भी हाशिये पर की जिंदगी जीने के लिए क्यों मजबूर है? यदि साहित्य का उद्देश्य मनुष्य और मनुष्यता नहीं है, तो हिंदी साहित्य को आदिवासी समाज के बिना क्यों प्रस्तुत किया जाए? हिन्दी साहित्य में निर्मला पुतुल की कविताएं सवाल उठाती हैं और अन्याय के खिलाफ ललकारती हैं। वह हर पाठक को विचार करने के लिए मजबूर करती है। इन कविताओं में स्वानुभूति का दर्द है। वह शब्दों को ऐसे फेंकती है कि पाठक समाज रूपी नगाड़े पर गिरकर गूँजने लगते हैं स निर्मला पुतुल की कविताएँ बेहतर भविष्य की उम्मीदों और आदिवासियों की दुःखद हालत का चित्रण करती हैं। परेशानियों और चुनौतियों के बावजूद उनका चेहरा आशावादी है। निर्मला पुतुल की कविताएँ आदिवासी लोगों की भावनाओ को चित्रित करती हैं, जो दुनिया को बेहतर और खुशहाल बनाना चाहती है। जो हिंदी समकालीन साहित्य में आदिवासी अस्मिता को पहचानने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
Download
Pages:18-20
How to cite this article:
अनीष कुमार साकेत "हिंदी समकालीन साहित्य में आदिवासी अस्मिता पर निर्मला पुतुल का योगदान". International Journal of Hindi Research, Vol 9, Issue 4, 2023, Pages 18-20
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.